by Pritma Domel

चिण्डीगढ़ साहित्य अकादमी द्वारा पुरस्कृत स्थापित् कहानीकारा प्रीतमा दोमेल का 'समय के सौदागर' नौवा कथा-संग्रह है, जो उनकी 'मेरीआँ चोणवीआँ कहाणियाँ' कर edge दी भाषा में अनुवाद है जिसमें पंद्रह कहानियाँ शामिल करें गई हैं। इन कहानियों में स्नेह-सद्भावना, पारिवारिक, सामाजिक, आर्थिक, नैतिक स्थितियों-परिस्थितियों के चित्रण के साथ-साथ बिखरते मानव मूल्यों, टूटते रिश्तों, चरमरातें पारिवारिक संबंधों की यथार्थ अभिव्यक्ति है। प्रीतमा दोमेल की पंजाबी कहानियों में अपनी अलग पहचान इस कारण हैं। कि इनके नारी पात्र परस्पर विरोध भावना या शत्रु भावना वाले कम, संवेदनशील मैत्री भावना संपन्न दर्दमंद सहयोगी अधिक दर्शाये गये हैं। जैसे कहानी 'आधा-आधा', 'प्रतीक्षा', 'चिट्ठी मिल गई' मानवीय संवेदनापूर्ण है और 'बोझ' इन्सानी हमदर्दी से लवरेज है। दोमेल की भाषा, शैली पात्र चित्रण बहुत प्रभावशाली। यहाँ सभी कहानियाँ सशक्त सृजनात्मक और आस्था विश्वासमूलक उद्देश्यों के साथ हमें सार्थक रूप में मानव मूल्यों को समझने की ओर प्रेरित करती हैं। आदरणीय प्रीतमा दोमेल की इच्छा एवं इनकी कहानियों के हृदय स्पर्शकारी प्रभाव के कारण इनका हिंदी रूपांतरण करने का प्रयास किया है। अनुवाद सहज कार्य नहीं। कितना सफल हुआ हूं यह कथा-मर्मज्ञ पाठकजन ही निर्णय करेंगे। प्रीतमा दोमेल जी को साधुवाद कहते हुए इनकी स्वस्थता और दीर्घायु की कामना करता हूँ। आमीन।
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