by Subhash Paras

सुभाष पारस केवल एक कवि ही नहीं‚ बल्कि ज़िंदगी में संघर्ष करने वाले हर व्यक्ति के लिए दीप-मीनार है। उसने शारीरिक विकलांगता, समाजिक कुरीतियों और राजनीतिक बर्बरता के दुख और कष्ट को अपने सीने पर झेला है और डट कर मुक़ाबला किया है और उसके ख़िलाफ़ आवाज़ बुलंद की है। विश्व पंजाबी साहित्यक विचार मंच सुभाष पारस की रचनाओं को पाठकों के सन्मुख प्रस्तुत करके प्रसन्नता एवं गर्व महसूस कर रहा है । जसपाल सिंह ‘देसूवी’ चेयरमैन विश्व पंजाबी साहित्यक विचार मंच
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