by Rahul Khokhar
कितनी ही लिखी कविताएं उखाड़ फेंकी है मैने, जबरन मुस्कुराती दुनिया देखी है , आ चले ग़ालिब शहर अपने ये कैसा शहर है ? जहां बारिश लोगो ने कभी कभी देखी है ||
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